Event List

PMKVY

Read More

SAVE GIRL CHILD BHRUN HATYA NARI SURAKSHA RESPECT OF WOMEN

भ्रूण हत्या और स्त्रियों की उपेक्षा

स्त्री और पुरुष जीवन रुपी गाड़ी के दो पहिये है । एक पहिये का भी संतुलन बिगड़ जाने से जीवन की गाड़ी रूक जाती है। हमारा समाज पुरुष प्रधान है जिसमे स्त्रियों का दायरा बहुत ही संकुचित है । हमने स्त्री को उतने ही हक़ दिए है जितने में पुरुष की स्वतंत्रता में कोई खलल नही पड़े । एक तरफ हम दुर्गा, लक्ष्मी आदि देवियों की पूजा करते है दूसरे तरफ समाज में स्त्रियों को प्रताड़ित करते है । हमने स्त्रियों को एक मर्यादा के दायरे में बांध के रखा है जहाँ पे वे निर्णय लेनें के लिए पुरुषो पे आश्रित होती  है ।

भ्रूण हत्या समाज में स्त्रियों की उपेक्षा का ही परिणाम है । लोग बेटे को बेटी से ज्यादा तवज्जो देते है । बेटे के जन्म को उत्सव की तरह मनाया जाता है जबकि बेटियों के जन्म को समाज मातम के रूप में देखता है । शिक्षित समाज में बेटियों को लेकर जागरूकता बढ़ी है किन्तु रूढ़िवादी विचारधारा के लोग अभी भी बेटियों के जन्म को श्राप समझते है । घर में उन बहुओं का भी अपमान होता है जो बेटी को जन्म देती है । इतनी सी बात हमारे समझ में क्यों नही आती कि बेटा या बेटी होना इंसान के हाथ में नही है बल्कि ये तो एक ईश्वरीय वरदान है । 

इन्ही कुत्सित विचारधार की वजह से लोग बेटी को जन्म से पहले ही कोख में ही मार देते है । इतनी सी बात लोगो के समझ में नही आती है कि जाने अनजाने में एक हत्या ही कर रहे है । क्या स्त्री के बिना संतान की कल्पना संभव है ? फिर कल्पना कीजिये कि अगर हमने स्त्रियों को कोख में ही ऐसे मारते रहे तो बहु कहा से लाएंगे और बहु नही रहेगी तो फिर बेटा कहा से होगा ? भ्रूण हत्या समाज में स्त्री और पुरुष के अनुपात में काफी अंतर पैदा कर रहा है । ये सामाजिक असंतुलन, समाज व् राष्ट्र के लिए हितकर नही है ।  एक स्त्री के बिना पुरुष का जीवन अधूरा है । एक स्त्री ही पुरुष के जीवन को सँवारती है।  माँ, जो हमे जन्म देती वो एक स्त्री ही होती है । इंसान अपने जीवन में जितना स्नेह स्त्री से प्राप्त करता है, क्या उतना स्नेह एक पुरुष से प्राप्त होता है? फिर क्यों हम उनका तिरस्कार करते है?

हमारी संस्कृति में स्त्री को पुरुष से श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है । शास्त्रो में वर्णन है कि  " यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:”  अर्थात जहाँ स्त्रियों का आदर-सम्मान होता है वह देवताओ का निवास होता है। 

बेटे की चाह में बेटियों का तिरस्कार करने वाले ये भूल जाते है कि बेटियां भी उतना ही योग्य होती है जितने कि बेटे होते है , बस बेटियों को अवसर नही दिया जाता है । जब भी माँ बाप ने बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है बेटियों से बेटो से बेहतर करके दिखाया है । बेटियों की शिक्षा में भी अनदेखी की जाती है, जहाँ एक और बेटों को पढ़ने के लिए अच्छी सुख सुविधाएं मिलती है वही बेटियों को घर के कामों में लगा दिया जाता है । कहते है कि जब एक पुरुष शिक्षित होता है तो वह खुद शिक्षित होता है, किन्तु एक स्त्री शिक्षित होती है तो पूरा घर और पूरा समाज शिक्षित होता है। बच्चो के पालन -पोषण की जिम्मेदारी एक स्त्री की होती है । ऐसे में अगर स्त्री शिक्षित है तो , ज्यादा बेहतर तरीके बच्चे की परवरिश कर पायेगी और देश व् समाज को बेहतर नागरिक दे पायेगी ।

मुस्कान के चैयरमैन “ श्री अजय पाण्डेय जी” भ्रूण हत्या के खिलाफ एक सामाजिक अभियान चला रहे है | बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ अभियान के जरिये वे स्त्रियों को समाज में उचित मान सम्मान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है| उनके इस शुभ प्रयास के लिए अनेक-अनेक साधुवाद

दीपक कुमार

Designed and Devloped by Himanshu Shekhar