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NATIONAL DIGITAL LITERACY MISSION NDLM DISHA

NATIONAL DIGITAL LITERACY MISSION (NDLM / DISHA)

रोटी, कपड़ा और माकन के बाद आज इन्सान की सबसे बड़ी और अहम् जरुरत मोबाइल है | मोबाइल के

बिना इन्सान अपने जीवन की कल्पना भी नही कर सकता है; क्योंकि मोबाइल अब सिर्फ कॉल या मेसेज

करने की डिवाइस मात्र नहीं रहा बल्कि स्मार्ट फोन के रूप में पूरा कंप्यूटर हमारे हाथो में आ गया है | आज

से 10-12 साल पूर्व शायद ही हमने ये कल्पना किया होगा कि कभी मोबाइल फोन के जरिये हम ईमेल कर

सकेंगे है, रेलवे या सिनेमा की टिकेट बुक किया जा सकेगा, बिजली या फोन का बिल भरा जा सकेगा या

मोबाइल से पैसे ट्रान्सफर किया जा सकेगा |

कंप्यूटर, टेबलेट, स्मार्टफोन, इन्टरनेट जैसे तकनीक ने हमारे जीवन को बेहद ही सरल बना दिया है | जहाँ

एक ओर लोग इन तकनीको का इस्तेमाल करके बहुत तेजी के साथ तरक्की कर रहे है वही दूसरी ओर एक

बहुत बड़ी जनसंख्या इन तकनिकी सुविधाओ से महरूम है |

ऐसे में प्रधानमंत्री श्री “नरेन्द्र मोदी” का विज़न “डिजिटल इंडिया” उनके दूरगामी दृष्टीकोण को परिलक्षित

करता है | वे इस बात को बखूबी समझते है कि जब तक प्रत्येक नागरिक तकनीकी संसाधनों का भरपूर

उपयोग नहीं करेगा तब तक ना ही उसकी तरक्की होगी और ना ही राष्ट्र की तरक्की होगी | हम आज

सूचना क्रांति के युग में जी रहे है और इस सूचना क्रांति के युग में बिना तकनीक के तरक्की करना

प्रधानमंत्री के इस विज़न को पूरा करने के लिए देशव्यापी “ डिजिटल साक्षरता अभियान (दिशा)” चलाया जा

रहा है | इसे “नेशनल डिजिटल लिटरेसी मिशन (NDLM)” के नाम से भी जाना जाता है | इस परियोजना को

इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रोद्धोगिक मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा है | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी कहते है

“When I say ‘Digital India’ it is not meant for the rich but for those who are poor” | इस कार्यक्रम के तहत

समाज के उस तबके को डिजिटल साक्षर बनाना है जिनकी पहुँच इन सुविधाओ तक नही है | आंगनवाड़ी और

आशा कार्यकर्ता व् अधिकृत राशन डीलरों को भी इस स्कीम में जोड़ा गया है । इस अभियान का उद्देश्य

प्रशिक्षु की जरुरत के अनुसार प्रासंगिक बुनियादी आईटी कौशल प्रदान करना है जिसमे नांगरिक आईटी

सम्बंधित अनुप्रयोगों का उपयोग कर पाए और लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सके साथ ही

अपनी आजीविका के अवसरों को बढ़ा सके । इस प्रोग्राम के तहत 14 से 60 वर्ष के आयु तक के लोगो को

मुफ्त कंप्यूटर शिक्षा प्रदान की जा रही है | प्रोग्राम को 2 स्तर में बांटा गया है | पहले स्तर में 10 दिन में

20 घंटे की ट्रेनिंग दी जा रही है वही दूसरे स्तर में 20 दिन और 40 घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है | इसमें

अभ्यर्थियों को कंप्यूटर, स्मार्टफोन, टेबलेट, इन्टरनेट, ईमेल, सोशल मीडिया इत्यादि की जानकारी दी जाती है

| 10 दिन के ट्रेनिंग के बाद अभ्यर्थियों का online परीक्षा लिया जाता है, जिसमे पास होने पर अभ्यर्थियों को

“ डिजिटल साक्षरता का अधिमूल्यन (Appreciation of Digital Literacy )” प्रमाणपत्र दिया जाता है | पहले चरण

में 52.5 लाख लोगो को डिजिटल साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया था किन्तु अब तक 77 लाख लोग इस

योजना का लाभ ले चुके है | सूचना और प्रोद्धोगिक मंत्रालय की तरफ से दूसरें चरण में 2019 तक छ करोड़

लोगो को शिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है |

इस प्रोग्राम में अभ्यर्थियों को “ट्रेनिंग पार्टनर”, व् “ट्रेनिंग सेंटर” के जरिये ट्रेनिंग दी जा रही है | आज तक

आंकड़े के अनुसार दिल्ली का ट्रेनिंग पार्टनर “मुस्कान (एक सामाजिक संस्था)” अब तक सबसे अधिक लोगो

को ट्रेनिंग दे चुका है. मुस्कान अब तक 25 हजार से अधिक लोगो को शिक्षित कर चुका है | मुस्कान के

चेयरमैन “श्री अजय पाण्डेय जी “ से बात करने पे उन्होंने बताया की वो भारत की शिक्षा स्तर में सुधार

लाना चाहते है इसलिए प्रधानमंत्री के “डिजिटल इंडिया” विज़न को पूरा करने में पूर्ण सहयोग कर रहे है |

मुस्कान पुरे देश में मोदी जी के विज़न को पूरा करने में अहम् भूमिका निभा रहा है |

प्रधानमंत्री के विज़न “डिजिटल इंडिया” के लिए शुभकामनाये |

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